Body Held Hostage : साल 2015 में रिलीज हुई अभिनेता अक्षय कुमार की गब्बर इज बैक फिल्म तो सभी को याद होगी। उस फिल्म में एक सीन था, जहां पर एक गरीब व्यक्ति अपने मृत पिता को निजी अस्पताल पहुंचाता है। अस्पताल प्रबंधन भी लालच में आकर शव को आईसीयू में रखकर उपचार के नाम पर उन्हें भारी भरकम बिल थमा देता है। कुछ ऐसी ही घटना उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के गोलना करड़िया निवासी टैक्सी चालक नंदन बिरौड़िया के साथ भी हल्द्वानी के एक बड़े निजी अस्पताल में घटी है। नंदन की 40 वर्षीय पत्नी को अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से हायर सेंटर रेफर किया गया था। उन्होंने बीते शनिवार को पत्नी सीमा को हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। इससे पहले ही अस्पताल प्रबंधन ने नंदन से 50 हजार रुपये जमा करा लिए थे। उसके बाद सात हजार रुपये और जमा कराए गए। अस्पताल में भर्ती होने के दो घंटे के भीतर ही सीमा की मौत हो गई थी। उसके बाद भी निजी अस्पताल में उपचार का ड्रामा चलता रहा और गरीब चालक को 90 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। वह पहले ही 57 हजार रुपये जमा कर चुका था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को नकारा है।