
कर्मचारियों एक ओर कमलेश्वरी मेहता का उदाहरण देते हुए आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया, वहीं पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। कर्मचारियों ने कहा कि जिस कार्यालय कक्ष में पूरी घटना हुई, अभी तक पुलिस जांच टीम ने उसका निरीक्षण तक नहीं किया है। न ही सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों को बचाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। धरना स्थल पर अफसर, शिक्षक और कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अभी तक सिर्फ आश्वासन मिला है, और बिना ठोस परिणाम के वे पीछे नहीं हटेंगे। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं प्रशासनिक कार्यप्रणाली और शासकीय व्यवस्था की गरिमा के विपरीत हैं। इससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि ऐसा आगे न हो।