अब एक माह बाद देंगे दर्शन, जानें इस परंपरा का महत्व


Unique Tradition : भगवान शिव घी की गुफा (घृत कमल) में साधनारत हो गए हैं। ये अनूठी परंपरा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित अष्टम ज्योतिर्लिंग श्री जागेश्वर मंदिर में सदियों से प्रचलित है। भीषण ठंड के चलते जब जागेश्वर क्षेत्र में नदी नाले जमने लगते हैं और चहुंओर पाले की चादर बिछने लगती है, तब माघ एक गते यानी मकर संक्रांति पर हर साल भगवान शिव एक माह के लिए घी की गुफा में साधनारत हो जाते हैं। आज सुबह जागेश्वर मंदिर प्रांगण में वेद मंत्रों के पाठ के साथ घृत कमल निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। ज्योर्तिर्लिंग के मुख्य पुजारी पंडा हेमंत भट्ट उर्फ कैलाशानंद महाराज ने बताया कि आज मकर संक्रांति पर भगवान शिव के लिए घृत कमल तैयार किया गया। घृत कमल तैयार करने के लिए भक्तों और मंदिर समिति की ओर से 251 किलो शुद्ध गाय के घी की व्यवस्था कराई गई थी। स्वस्ति वाचन के साथ अग्नि प्रज्ज्वलित की गई और उसके बाद बड़े-बड़े बगौनों में घी का पिघलाकर शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू हुई। दोपहर बाद घृत कमल बनकर तैयार हुआ। उसके बाद ज्योर्तिलिंग बाबा को घी की गुफा के आवरण में ढक दिया गया। इससे समूचे इलाके का माहौल भक्तिमय बन गया। हजारों की संख्या में भक्तजन इस अनूठी परंपरा के साक्षी बने।



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