एरीज के वैज्ञानिक प्रो. संतोष जोशी के मुताबिक धूमकेतु को अक्सर गंदे हिमगोले कहा जाता है। वे पानी की बर्फ, जमी गैसों, धूल और पत्थरों से बने होते हैं। सूर्य के पास आने पर इनकी बर्फ तेजी से गैस में बदलती है और इसके चारों ओर धुंधला गुबार यानी कोमा बनाती है। कई बार सूर्य के प्रकाश का दबाव इसकी लंबी पूंछ भी बना देता है, इसलिए इन्हें पुच्छल तारा कहा जाता है। 3 आई एटलस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हमारे सौर मंडल का हिस्सा नहीं है। इसकी कक्षा साबित करती है कि यह किसी दूरस्थ तारकीय प्रणाली से होकर यहां पहुंचा है, गुजरने के बाद हमेशा के लिए अंतरिक्ष में खो जाएगा।