राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण की जांच के दौरान वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य संबंधित सबूतों की पड़ताल की गई। जांच में यह पुष्टि हुई कि 6 फरवरी 2023 को शिकायतकर्ता से वास्तव में SSP कार्यालय में पूछताछ की गई थी। उन्हें जरूरी समय सीमा से ज्यादा देर तक वहीं रोककर रखा गया, जिसे सेवा नियमों का उल्लंघन माना गया है। जांच में सामने आया कि मामले के कई गवाह पुलिस विभाग से जुड़े हुए थे, इसलिए प्राधिकरण ने उनकी गवाही को पूरी तरह निष्पक्ष नहीं माना।