
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश के भीतर भले ही हम लोग आपस में लड़ते हों। संसद में एक दूसरे के कपड़े फाड़े जाते हों, लेकिन जब बात देश की आती है, तो सभी एक हो जाते हैं। विश्व भर में मिल कर देश की समृद्धि, शक्ति, एकजुटता का प्रचार करते हैं। कहा कि संस्कार और तकनीक में समन्वय, अनुशासन बनाना जरूरी है। संस्कार, अनुशासन की कीमत पर तकनीक बेहतर नहीं है। इसे पाने को मानवीयता की बलि देना ठीक नहीं है। जेन जी पर कहा कि उनके सवालों का जवाब देने को जानकारी बढ़ानी होगी। उन्हें सही बात बताई जाए। आदर्श प्रस्तुत किया जाए।