
आईआईटी रुड़की के अध्ययन में पाया गया कि पश्चिमी विक्षोभ, जो पारंपरिक रूप से केवल सर्दियों में हिमपात के लिए जिम्मेदार होते थे, अब प्री-मानसून काल (मार्च से मई) में भी अत्यधिक सक्रिय हो रहे हैं। आईआईटी में जल विज्ञान विभाग के प्रो.अंकित अग्रवाल के मुताबिक, मौसमी चक्र में बदलाव भविष्य में जल संसाधनों की उपलब्धता को भी प्रभावित करेगा। इधर, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमायन संस्थान के वैज्ञानिक भी सीजन शिफ्टिंग की ओर इशारा पूर्व में ही कर चुके हैं।