Danger Alert:झील के बढ़त आकार से वैज्ञानिक और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। उत्तराखंड के टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र में दूधगंगा ग्लेशियर पिघलने से बनी भिलंगना झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। ग्लेशियर पिघलने के कारण लगातार इस झील का आकार बड़ा होता जा रहा है। साल 1980 में अस्तित्व में आई इस झील का आकार अब 1.204 किमी और चौड़ाई 528 मीटर हो चुका है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक देश के चार बड़े संस्थानों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार का अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययन में भिलंगना झील के बढ़ते आकार का मामला सामने आने से लोग चिंतित हैं। बता दें कि उत्तराखंड में केदारनाथ आपदा हो या खीरगंगा आपदा ये महाविनाश की ये बड़ी घटनाएं झीलों के फंटने के कारण ही हुई थी। इन जल प्रलयों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। केदारनाथ आपदा का जख्म पूरे देश को अब भी याद ही होगा। केदारनाथ आपदा के बाद से वैज्ञानिकों का रुख पिघलते ग्लेशियर की ओर बढ़ा है। देश के वैज्ञानिक उत्तराखंड के ग्लेशियर और उनसे बनने वाली झीलों का लगातार अध्ययन कर रहे हैं। इधर, वाडिया हिमालय भू-वैज्ञानिक संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक अमित कुमार के मुताबिक, इस झील का आउटब्रस्ट 30 मीटर प्रति सेकेंड के रफ्तार से 3645 क्यूबिक मीटर पानी छोड़ सकता है।