जागेश्वर मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में भी इसे आरटीआई के दायरे में लाने का प्रस्ताव पास हो चुका था। बावजूद इसके जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति में आरटीआई लागू नहीं हो रही है। यहां तक की जिला प्रशासन भी जागेश्वर मंदिर समिति से जुड़े मामलों में आरटीआई देने से इनकार कर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित इस समिति को निजी संस्था करार दिया जा रहा है। जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति में लंबे समय से उपाध्यक्ष, प्रबंधक और पुजारी प्रतिनिधि के पद खाली चल रहे हैं। प्रबंधक का पद तो करीब 15 माह से खाली चल रहा है। ये समिति मौजूदा समय में सरकारी मोड पर संचालित हो रही है, जोकि न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। याचिका में सीएजी ऑडिट, आरटीआई समेत कई जनहित के बिंदु शामिल किए गए हैं।